Statue of unity in Hindi

statue of unity images
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statue of unity देश का गर्व है जो की प्रधानमंत्री Narendra Modi के द्वारा शिलन्यास और उद्घाटन किया गया है , आइये हम statue of unity के कुछ रोचक तथ्यों को जाने।

भारत के इतिहास से जुड़े वह शख्स जिन्होंने देश का हाथ तब थामा था ,जब आशा की किरणे दिखाई देनी बंद हो गयी थी | जब देश के  बिखरने का डर सताने लगा था तब भारत माता के इस लाल ने वो किया जिसके कारण आज भी हमारी जुबान पर इनका नाम आता है और हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है |

उस भारतीय स्वंत्रता सेनानी का नाम है Sardar Vallab Bhai Patel जी हाँ ये ही वो शख्स थे जिन्होंने Mahatma Gandhi के विचारों  से प्रेरित होकर भारत के स्वंत्रता आंदोलन में भाग लिया व एक भव्य देश का निर्माण किया था  |

इसी संघर्ष पूर्ण जीवन के चलते यह देश के India’s First Home-minister और sub-Prime-minister बने थे|भारत ऐसे सेनानियों का हरदम सम्मान करता है और इनके नक़्शे कदम पर चलने की कोशिश करता है |

पटेल जी सबके दिल में तो रहते ही है पर अब इनके दर्शन का दीदार पुरे भारत वासियों के साथ साथ पूरा विश्व कर सकेगा  | इस बार उनकी 143वीं जयंती पर इनके सम्मान में एक प्रतिमा Statue Of Unity‘ को  तैयार कर उसे देश को समर्पित किया गया है |

Sardar Vallab Bhai Patel जी का परिचय

 Sardar Vallab Bhai Patel  जी का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाद, Gujrat के एक कृषक परिवार में हुआ था | इन्होने लंदन में जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की और वापिस आकर अहमदाबाद में वकालत का ज्ञान अर्जित किया |

देश प्रेम के चलते इन्होने सबसे पहले अपना योगदान खेड़ा डिवीज़न में दिया और  उन दिनों किसान सूखे की मार झेल रहे थे जिस कारण किसानो ने अंग्रेज़ सरकार से कर(टैक्स) माफ़ करने की मांग की |

जब अंग्रेज सरकार ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की तब सरदार पटेल , गांधीजी व अन्य सेनानियों ने किसानो को कर न देने के लिए प्रेरित किया और परिणाम स्वरूप सरकार को अपने कदम पीछे करने पड़े | यह Sardar Vallab Bhai Patel (Sardar Vallab Bhai Patel) जी की पहली उपलब्धि थी | 

sardar vallabhbhai patel statue

Gujarat Government द्वारा पटेल जी के 148वें जन्म दिवस पर एक बेमिसाल प्रतिमा का शिलान्यास किया गया | जिसको Statue Of Unity’ के  प्रतीक की उपाधि दी गयी है | इस भव्य प्रतिमा का निर्माण का आगाज़ तत्कालीन मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2013 को किया था | जिसे 2018 के अक्टूबर के मध्य में पूर्ण रूप से तैयार कर दिया गया | 

प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी जी ने ही 31 अक्टूबर 2018  को सरदार पटेल के जन्मदिवस पर Statue Of Unity’ का उद्घाटन किया व देश को समर्पित किया  | यह स्मारक सरदार सरोवर बाँध से 3.2 किमी की दुरी पर साधु बेट नामक स्थान पर है जो की Narmada नदी पर एक टापू है |

Sardar vallabhbhai Patel statue height

Statue Of Unity’ की ऊंचाई 182 मीटर यानि की 597 फुट है और चीन की स्प्रिंग बुद्ध मन्दिर की ऊंचाई 153 मीटर है | विशालकाय मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति है | इस प्रतिमा की सुंदरता देखते ही बनती है और इसकी ऊंचाई इतनी है की मानो की पैर धरती पर और सिर आसमान पर हों  |

इसको बनाने में कुल लागत 3,000 करोड़ रूपए के लगभग आई है | सरदार जी के पैरों की ऊंचाई 80 फिट है, हाथ की 70 फिट, कंधे की ऊंचाई 140 फिट है व चेहरे की ऊंचाई 70 फिट है |

इस प्रतिमा की झलक 7 किलोमीटर दूर से देखी  जाती है | इस मूर्ति को World of Statue के नाम से अवार्ड प्राप्त है | इस प्रतिमा को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है की 6.5 रिक्टर पैमाने पर आये भूकंप के झटको का भी इस प्रतिमा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा |

180 किलोमीटर प्रति घंटे से चलने वाली हवा से भी मूर्ति की स्थिरता बनी रहेगी | World of Statue को देखने के लिए पर्यटकों को कुल 380 रूपए ख़र्च करने पड़ेंगे जिसमें 350 मूर्तिदर्शन व 30 रूपए बस का किराया देना होगा |

Narmada नदी है ख़ास ‘ जाने क्यों ?

statue of unity images

भारत की सात नदियों में Narmada नदी का भी उल्लेख है जिसे रेवा के नाम से भी जाना जाता है | Narmada नदी भारत की एक नदी और भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवी सबसे बड़ी नदी है | इस नदी पर एक बाँध भी बना हुआ है जिसे सरदार सरोवर बाँध भी कहा जाता है इसी सरोवर बाँध से 3. 2 किलोमीटर की दुरी पर इस विशाल मूर्ति की स्थापना की गयी है |

प्रधानमंत्री के मुताबिक़ इस भव्य प्रतिमा के माध्यम से सरोवर डैम, सतपुड़ा और विंध्य के पर्वतो के दर्शन भी कर पाएंगे |  नाव के द्वारा केवल पॉंच मिंटो में मूर्ति तक पहुंचा जा सकता है |

Narmada नदी व मूर्ति को देखने के लिए एक आधुनिक प्लाज़ा भी बनाया गया है | इसमें खान पान के स्टाल उपहार की दुकाने और भी अन्य सुविधाएं शामिल है | जिससे पर्यटकों के लाभ देने के नज़रिये से बनाया गया है |

स्थानीय लोगो की Narmada District स्थित सरोवर बाँध से धार्मिक लगाव जुड़ा है | उनका दावा है की साधु बेटे का वास्तविक नाम वरट  बावा टेकरी है | जो की एक एक स्थानीय देवी के नाम पर पड़ा है |

Narmada District के किनारे बसे नगर ओंकारेश्वर, जबलपुर, रायगढ़ हैं | इस नदी से कई डैम बने है महेश्वर बाँध, इंदिरा सागर बाँध, सरदार सरोवर बाँध, रानीपुर बाँध आदि हैं | यह नदी पश्चिम की तरफ खम्बात की खाड़ी में गिरती है |

 Where is statue of unity Situated

  Sardar Vallab Bhai Patel  जी का जन्म भी Gujrat के ही नडियाद गाँव में हुआ था | जिस वजह से यहां के लोग इस बात का गर्व भी महसूस करते है |  आजकल Gujrat एक चर्चा का विषय बना हुआ है इसी कई वजह है जो मुख्य कारण है वो है हमारे देश के तत्कालीन प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी Gujrat के ही मुख्यमन्त्री है |

दूसरी विशेष कारण है की अब पूरी दुनिया में Gujrat का नाम गूंजेगा क्योंकि Gujrat में ही इस महान मूर्ति को बनाया गया है | जिसकी वजह से देश विदेश के पर्यटक इस  Statue Of Unity‘ को देखने के लिए Gujrat में अपने पाँव रखने ही पड़ेंगे |  Gujrat सरकार द्वारा 7 अक्टूबर  2010 में इस मूर्ति के निर्माण के लिए घोषणा की गयी थी |

who built statue of unity

 भारत में कुशल लोगो की कमी नहीं है यान के लोगो के इरादे इतने मज़बूत है की उम्र भी कम पड़ जाती है ऐसा इसलिए कहना पद रहा है की जिस कलाकार ने इस विशाल मूर्ति को बनाया है उसकी उम्र 92 वर्ष है जी हाँ जिस उम्र में लोग लाठी का सहारा लेते है उस उम्र में इस भव्य प्रतिमा को बनाया है |

92 वर्षीय इस कलाकर का नाम Ram V Sutar | इस शिल्पकार ने देश के नाम कई  प्रतिमाओं को किया है जिनको देखकर हर भारतीय देश के सेनानियों को सम्मानित करते है | Ram V Sutar आज भी मुस्कराते हुए कहते है की आज भी गांधी मेरे लिए एक सपने की तरह है |

1925 में महाराष्ट्र्य के एक छोटे से गाँव में जन्मे Ram V Sutar ने स्कूली शिक्षा के दौरान पहली बार मुस्कराते हुए गांधी की मूर्ति बनाई थी | स्कूल के बाद वह ‘जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई पूरी की ज्यूँ ज्यूँ उनकी उम्र बढ़ती गयी उनके नाम का डंका बजने लगा |

Ram V Sutar जी ने अम्बेडकर, दीन दयाल उपाध्याय, गांधी जी , ढेर सारे महा पुरुषो के बाद अब सरदार वल्लब भाई की मूर्ति बनाकर इतिहास रच चुके है | इस मूर्ति को बनाने में तीन हज़ार से ज्यादा लोगो को काम में लाया गया | सब की कड़ी मेहनत के बाद केवल 33 महीनो में ही Statue Of Unity’  को पूर्ण रूप से पर्यटकों के लिए तैयार कर दिया है |

How to Bluid sardar vallabhbhai patel statue

 इस मूर्ति को बनाने के लिए पुरे देश के किसानो द्वारा दिए गए बेकार लोहे की सहायता से बनाया गया है | सरदार वल्ल्ब भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट ने इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पुरे देश में 36 कार्यालय खोले | तीन माह तक चले इस मूर्ति के अभियान के लिए लोहा एकत्रित करने के लिए 6 लाख ग्रामीणों ने मूर्ति स्थापना हेतु लोहा दान किया | इस दौरान लगभग 5,000 मीट्रिक टन लोहे का संग्रह किया गया | अन्य ओर प्रयासों की मदद से इस भव्य मूर्ति का काम पूर्ण हो सका | 

मूर्ति से जुडी कुछ विशेष बातें

Statue Of Unity’ पर कांस्य का लेपन किया गया है जिससे ये देखने में और भी आकर्षित लग रही है | इस की लम्बाई को तय करने के लिए इसमें पर्यटकों के लिए लिफ्ट की सुविधा भी दी गयी है | छत की स्मारक पर प्रदर्शनी हॉल है जिसमे सरदार जी के जीवन के बारें में उनके संघर्ष और उपलब्धियों को दर्शाया गया है | इस प्रतिमा को इस प्रकार बनाया गया है की एक वक्त में 200 लोग इस मूर्ति के दर्शन कर सकेंगे |

sardar vallabhbhai patel statue cost?

 तीन करोड़ में बनी इस मूर्ति को बनाने में सबसे बड़ी समस्या ये ही थी की पैसे का प्रबंध कैसे किया जाये पर कहते है ना इरादे नेक हो तो सब आसान हो जाता है | इसी के चलते सबसे ज्यादा योगदान Gujrat सरकार का हुआ है | Gujrat सरकार ने 2012-13 बजट में इस हेतु ₹100 करोड़, 2014-15 में ₹500 करोड़ इकट्ठा किया था | 2014-15  भारतीय संग के बजट में से इस शुभ काम के लिए 2 अरब एक एकत्रित किये गए | साथ ही ऑनलाइन भी कई लोगो ने दान दिया था और कुछ ट्रस्ट की सहायता से मूर्ति पूरी की गयी | 

इस गगन चुम्बी इमारत से मिला रोज़गार !!!

कोई भी टूरिस्ट प्लेस क्यों ना हो वह स्थानीय लोगो के लिए एक रोज़गार का साधन बन जाता है वह फिर चाहे किसी भी रूप में हो | Statue Of Unity’  जो की अब एक टूरिस्ट प्लेस की सूचि में गिना जायेगा  | अगर कोई Gujrat में घूमने आये और इस इमारत को ना  निहारे ऐसा हो ही नहीं सकता और जो भी इसे देखने आयेगा उन्हें कुछ न कुछ सुविधा की अवश्य ही जरूरत पड़ेगी और ये ही जरूरत कई लोगो का रोज़गार बनेगा | जिसको को ध्यान में रख कर एक प्लाज़ा भी खोला गया है जिसमे दुकाने खोली जायेंगी और लोगो को मूर्ति देखने के लिए बस का सहारा लेना पड़ेगा और साथ ही  साथ मेन्टेन्स , सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी की सुविधा आदि और भी कई तरीको से लोगो को रोज़गार दिया गया है |

किस किस मूर्ति को किया निचे ?

देशभर में अनेक ऐसी मूर्तियों का निर्माण किया गया जिससे उस देश के लोगो गर्व महसूस होता है | इसी दौड़ में भारत अब पहले स्थान पर है जिसके नाम सबसे ऊँची मूर्तियों में आता है इससे पहले भी कई देश थे जिनके नाम इस सूचि में थे | स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध की मूर्ति अब दूसरे स्थान पर है जिसकी ऊंचाई 153 मीटर की है | तीसरे स्थान पर यू्शिकु दाईबुत्शु जो की जापान में है इसकी ऊंचाई 120 मीटर चौथे स्थान पर अमेरिका का नाम आता यान स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी नाम से एक मूर्ति है जिसकी ऊंचाई केवल 93 मीटर की है | द मदरलैंड कॉल्स जो की रूस में स्थित है इसकी ऊंचाई 85 मीटर की है |

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