मै अपनी सासू माँ का अपमान नहीं सह पाऊंगी।

काब्या बेटा जल्दी करो कितना टाईम लगाओगी तुम , हमें जल्दी पहुंचना है।नहीं तो भैया भाभी (केदार जी और कामिनी जी ) समझेंगे की हम जान बुझ कर लेट पहुंचे हैं, और ओ नाराज हो जाएंगे।मेरी तीनों बहने और जीजा जी तो कल शाम को ही पहुंच गए वहां, बस हमलोग ही लेट पहुंचने वाले हैं।। साबित्री जी अपनी बहू को देखते हुए बोली

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जी मम्मी जी बस हो ही गया चलिए हमलोग निकलते हैं, लेकिन मम्मी जी पापा जी (जितेन्द्र जी) और विशाल जी तो अभी तक आए ही नहीं काब्या अपनी सासू मा (सावित्री जी) को देखते हुए उलझन भरे स्वर में बोली।
बस आते ही होंगे दोनों, एक बार फ़ोन करके पूछ लो बहू, ऐसे तुम बहुत प्यारी लग रही हो बहू साबित्री जी प्यार से निहारते हुए अपनी बहू से बोली। तो काब्या मुस्कुराते हुए फोन लगाने लगी विशाल को।
क्या बात है माँ जब देखो अपनी बहू की तारीफ करती रहती हो, कुछ अपने बेटे के लिए भी बचा कर रखो। विशाल घर में आते हुए अपनी माँ से बोला ।।मेरी बहू है ही इतनी प्यारी की हर कोई उसकी तारीफ करे जितेन्द्र जी बोले।।

अब चलिए पहले ही बहुत लेट हो चुका है, गृहप्रवेश की पूजा भी वहां शुरू हो रहा होगा तभी साबित्री जी बोली।।और सभी साथ में वहां जाने के लिए निकल पड़े।। वहां पहुंचने पर उनलोगो ने देखा पूरा घर फूलों से सजा था मेहमान आ जा रहे थे।

लगता है पूजा शुरू हो चुका है, चलिए अंदर चलते है जितेन्द्र जी सावित्री जी को देखते हुए बोले।। काब्या को साथ लेकर सबित्री जी घर के अंदर गई तो कामिनी जी ने उनका आदर पूर्वक स्वागत किया और फिर से काम में व्यस्त हो गई।।
विशाल और जितेन्द्र जी भी घर के कार्य में हाथ बटाने में जुट गए।। अरे साबित्री दीदी आप थोड़ा काम मे मेरे साथ हेल्प करबा दीजिए कामिनी जी अपनी ननद साबित्री जी से बोलीं।।ह ह क्यों नहीं भाभी चलिए ,क्या करना है आप बताइए ,काब्या तुम बैठो मैं आती हूं।बोल कर साबित्री जी अपनी भाभी के साथ उनका सहायता कराने चली गई।

तभी कुछ औरतों का झुंड आकर काब्या के बगल में बैठ गई और इधर-उधर की बातें करने लगी।उसी में से एक बोली देखो कामिनी की ननद (सावित्री जी) आ गई अब सारा काम वही करेगी ,बाकी की सारी बहने बैठ कर बातें कर रही हैं, और वो नौकरानी की तरह काम करती हैं ,और सभी हसने लगी।काब्या को बहुत बुरा लगा।। तभी काब्या ने देखा सावित्री जी दौर दौर कर काम कर रही हैं ।।और पानी का एक ग्लास उठा कर पीने लगी।।


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अरे दीदी आप पानी पीने लगी कुछ मेहमान आए हैं, पहले उसको चाय तो जा कर दीजिए कामिनी जी साबित्री जी से बोली ।।ह जाती हूं बोलकर बिना पानी पिएं ही साबित्री जी चली गई।।और कामिनी जी बाकी ननद के साथ खड़ी होकर बात करने लगी।। अरे काब्या बहू इधर आओ तभी मेनिकाजी (सावित्री जी की दूर की बहन) कब्या से बोली।।जी आई, कहते हुए काब्या उनके पास जाकर खड़ी हो गई।

और बताओ सावित्री रखती हैं, न तुम्हे अच्छी तरह से मेनिकाजी काब्या को देखते हुए बोली ।जी मौसी जी बहुत अच्छी तरह से।। काब्या मुस्कुरा कर बोली।। अरे उसे तो आदत है दिखावा करने की ,मन की बड़ी खोटी है वो , यहां तो जब भी आती हैं तुम्हारी शिकायत करती है मुह बिचका कर काब्या को देखते हुए बोली मेनकाजी।।
काब्या ने कामिनी जी की तरफ देखा तो वह भी मुस्कुरा कर बोली सच कह रही हैं मेनका जी काब्या।।


बस चुप हो जाइए आपलोग ,कितनी अच्छी है मेरी सासू मां मैं उनका अपमान नहीं सह पाऊंगी।और मामी जी आप के घर में काम है,आप खरी होकर बाते कर रही हैं और मेरी सासू मा काम कर रही है तो आपको दिखावा लग रहा है। मै उनके खिलाफ एक शब्द नहीं सुन पाऊंगी। काब्या एक सांस में बोल गई।।तो कामिनी जी और मेनका जी चुपचाप एक दूसरे का मुंह देखने लगे ।उधर से आते हुए सावित्री जी ने जब अपनी बहू की बाते सुनी तो उनके आँखों से खुशी के आशू आ गए।।और उन्होंने काब्या को प्यार से गले लगा लिया।
तो मेनिका जी बोलने लगी दीदी तुम्हारी बहू तो बड़ी तेज है देखो तो कितना बोलती हैं।
मैंने सब सुन लिया है की कितनी अच्छी है मेरी बहू साबित्री जी मेनिका को देखते हुए बोली तो वह चुपचाप वहां से चली गई।।
हीरा है हमारी बहू क्यों विशाल तभी जितेन्द्र जी हँस कर बोले तो विशाल भी हसने लगा और बोला सचमुच आज काब्या ने तो मौसी की आदत सुधार दी।।

खैर पूजा समाप्त होने पर साबित्री जी काब्या , विशाल और जितेन्द्र जी सभी अपने घर पहुंचे।।और कपडे बदलकर सोने चले गए।।
काब्या तुम जैसी जीवन संगिनी पाकर मैं धन्य हो गया।। काब्या को प्यार से निहारते हुए विशाल बोला।। जी थैंक यू शरारत से काब्या बोली।। और दोनों खिलखिलाकर हसने लगे।

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